Tuesday, December 14, 2010

कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर

कभी आर, कभी पार, लागा तीरे नजर
सैयां घायल किया रे तुने मोरा जिगर...
कितना संभाला बैरी दो नैनों में खो गया
देखती रह गई मै तो जिया तेरा हो गया
दर्द मिला ये जीवन भर का
मारा ऐसा तीर नजर का, लूटा चैन करार
कभी आर, कभी पार, लागा तीरे नजर
सैयां घायल किया रे तुने मोरा जिगर...
पहले मिलन में ये तो दुनिया की रित है
बात में गुस्सा लेकिन दिल ही दिल में प्रीत है
मन ही मन में लड्डू फूटें, नैनों से फुलझड़ियाँ छूटें
होटोंपर तकरार
कभी आर, कभी पार, लागा तीरे नजर
सैयां घायल किया रे तुने मोरा जिगर...
मर्जी तिहारी चाहे मन में बसाओ जी
प्यार से देखो चाहे आंखों से गिराओ जी
दिल से दिल टकरा गए अब तो
चोट जिगर पर खा गए अब तो, अब तो हो गया प्यार
कभी आर, कभी पार, लागा तीरे नजर
सैयां घायल किया रे तुने मोरा जिगर...
कभी आर, कभी पार,


फिल्म:आरपार
गीतकार:मजरुह सुल्तानपुरी
संगीत ओ.पी.नय्यर

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