Wednesday, December 15, 2010

ऐ जी जाने मन

ऐ जी जाने मन..ऐ जी जाने मन
अपनों से यूँ नजरे चुराना छोड़ दो
ऐ जी जाने मन...नजरे चुराना छोड़ दो
हमको सताना छोड़ दो
ऐ जी जाने मन..
जख्मी है दिल, जख्मी जिगर
हम कुछ नहीं कहते मगर
तुम पर तो कोई मर मिटा
तुमने न डाली एक नजर
इतनी तुम्हे फुरसत नहीं
ऐसा भी क्या ऐ गुलबदन
ऐ जी जाने मन..
तुमको खबर क्या, इश्क में
कटती है कैसी जिंदगी
किस-किस की तमन्ना को तबाह
करके आती है हंसी
औरों को भी देखों कभी
होती है क्या दिल की लगन
ऐ जी जाने मन..
ख्वाबों में तुम खोये रहो
रातों को हम आहें भरें
ये इश्क आखिर इश्क है
तुम क्या करो हम क्या करें
तुम क्या करो हम क्या करें
उलटा है उल्फत का चलन
ऐ जी जाने मन..
ऐ जी जाने मन..
अपनों से यूँ नजरे चुराना छोड़ दो
ऐ जी जाने मन..

फिल्म:महबूबा
गीतकार:मजरूह
संगीतकार:ओ.पी.नय्यर




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