Tuesday, December 14, 2010

जब उसने गेसूं बिखराए

जब उसने  गेसूं बिखराए
बादल आया झूमके
मस्त उमंगें लहराई है
रंगी मुखड़ा चुमके
गुंचा महका, बुलबुल चहका
नाचे भंवरा झूमके
जब उसने  गेसूं बिखराए
बादल आया झूमके...
उसके नैन गुलाबी
उसके नैन गुलाबी
कर दे सबको शराबी
कर दे सबको शराबी
बादल आया झूमके..
जब उसने  गेसूं बिखराए
बादल आया झूमके...
जब हंस हंसकर वो बोले
कानो में वो रस घोले
हर दिल में अरमां डोले
इश्क अपनी आँखें खोले
हो ss उसने पैमाना छलकाया आ साकी
मस्ती में आँचल ढलकाया
आ साकी, रूम झूम,
रूम झूम
बादल आया झूमके... जब उसने  गेसूं बिखराए
बादल आया झूमके...
मस्त उमंगें लहराई है
रंगी मुखड़ा चुमके

फिल्म:शाहजहाँ
गीतकार:मजरूह सुल्तानपुरी
संगीतकार:नौशाद



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