Wednesday, December 15, 2010

गोरे गोरे मुखड़े पे गेसू ...

ओ हाय गोरे-गोरे
( गोरे-गोरे
गोरे-गोरे मुखड़े पे गेसू जो छा गये ) -२
चाँदनी रात में बादल कहाँ से आ गये -२
( गोरे-गोरे
गोरे-गोरे मुखड़े पे गेसू जो छा गये ) -२
आइना देख के वो देखते ही रह गये
वो देखते ही रह गये
धीरे-धीरे सपनों की लहरों में बह गये
वो लहरों में बह गये
अपनी अदा पे फिर ख़ुद ही शरमा गये -२
( गोरे-गोरे
गोरे-गोरे मुखड़े पे गेसू जो छा गये ) -२
( गेसू हटे तो वोही चाँदनी रात थी
छुप गये बादल पहली सी बात थी ) -२
चन्दा निकल आया तारे शरमा गये -२
( गोरे-गोरे
गोरे-गोरे मुखड़े पे गेसू जो छा गये ) -२

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